लड़कपन से आज तक
यही एक होड़ रही
पहले मैं या पहले तुम
या फिर हम सभी।
किसकी होनी है जीत
किसकी होगी हार।
हारने वाले की किस्मत
जीतने वाले को उपहार।
लक्ष्य किसको मिलेगा
कौन होगा कल विजेता।
जो अभिनय में हो पारंगत
वही होता अभिनेता।
अथक श्रम किसी का भी
खाली नही जाता।
स्वीकार ले जो हार शीघ्र
वो मंजिल नही पाता।
अभी और आगे जाना है
ऎसी चाहत जरूरी है।
सही वक्त का इंतजार करना
सबकी मजबूरी है
मैं मैं करते लोगों को
किस बात गुरूर रहता है।
गैरों की पनाह न मिलती
अपनों से दूर रहता है।
जिन्दगी मैं-मैं तुम-तुम में नही
हम में ही हसीन है।
जब साथ मिले सभी का
तो दुनिया रंगीन है।
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