Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

रचनाओं के माध्यम से साहित्य का सृजन , और समाज को नई दिशा...

Thursday, 18 August 2016

रक्षाबंधन

बहना है , कब से बांधने के लिए बेकरार।
भाई की कलाई सूनी, कर रही इंतजार।
राखी की चम-चम से, खुशियां अपार।
मीठे की मिठास में घुला, प्यार बेशुमार।
फिर से लो आ गया रक्षाबंधन का त्योहार।।

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