Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

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Thursday, 1 March 2018

मेल - मिलन की रंग - रंगीली 'होली'


बहुत दिनों से दूर रहा जो,
           मिल कर उसका ले लियो हाल।

ठंडाई का दे गिलास फिर, 
          कर तन-मन की अतरंगी चाल। ‎
गुजिया से मुंह मीठा करना, 
          पापड़ भरकर रख दियो थाल।
खूब रंग भरो पिचकारी में,
‎         सब के ऊपर जमकर डाल।
पहचान मिले न रंगना ऐसे,
‎         चाहे कितने पैकेट लगे गुलाल।
मेल मिलन की होली है ये, 
‎          गले लगाओ रंग दो गाल।
हर दिल में बस प्रेम हो अंकित
          यही कहे अंकित जायसवाल
ऐसी होली सभी मनाओ
           याद रहे जो सालों साल

इंद्रधनुष के रंगों से भी अधिक, रंगीन है ये रंगो की होली, 
समस्त पाठकों को 'होलिकोत्सव' की हार्दिक शुभकामनाएं।।

      .....     HAPPY HOLI      ....    

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