बहुत दिनों से दूर रहा जो,
मिल कर उसका ले लियो हाल।
ठंडाई का दे गिलास फिर,
कर तन-मन की अतरंगी चाल।
गुजिया से मुंह मीठा करना,
पापड़ भरकर रख दियो थाल।
खूब रंग भरो पिचकारी में,
सब के ऊपर जमकर डाल।
पहचान मिले न रंगना ऐसे,
चाहे कितने पैकेट लगे गुलाल।
मेल मिलन की होली है ये,
गले लगाओ रंग दो गाल।
हर दिल में बस प्रेम हो अंकित ,
यही कहे अंकित जायसवाल ।
ऐसी होली सभी मनाओ,
याद रहे जो सालों साल।
मिल कर उसका ले लियो हाल।
ठंडाई का दे गिलास फिर,
कर तन-मन की अतरंगी चाल।
गुजिया से मुंह मीठा करना,
पापड़ भरकर रख दियो थाल।
खूब रंग भरो पिचकारी में,
सब के ऊपर जमकर डाल।
पहचान मिले न रंगना ऐसे,
चाहे कितने पैकेट लगे गुलाल।
मेल मिलन की होली है ये,
गले लगाओ रंग दो गाल।
हर दिल में बस प्रेम हो अंकित ,
यही कहे अंकित जायसवाल ।
ऐसी होली सभी मनाओ,
याद रहे जो सालों साल।
इंद्रधनुष के रंगों से भी अधिक, रंगीन है ये रंगो की होली,
समस्त पाठकों को 'होलिकोत्सव' की हार्दिक शुभकामनाएं।।


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