विडम्बना है कि,
ये ह्रदय की गहराइयों से निकले जज्बात है। वास्तविकता बयां करती
वास्तव में ये उन दिनों की बात है।
वो दिन जब हम चले थे,
किसी महफूज़ जगह की तलाश में।
किसी महफूज़ जगह की तलाश में।
साथ मेरे वो अकेली,
केवल परछाई ही थी पास में।
मैं,
मैं चलता जा रहा था,
कुछ सोंचता जा रहा था।
कुछ मिलते जा रहे थे,
तो कोई छूटता जा रहा था।
तो कोई छूटता जा रहा था।
मुझे भीड़ में नये चेहरों का दीदार हो रहा था,
हर शख्स के मिलते हर पल,
हर लम्हा त्योहार हो रहा था।
सच कहता हूँ -
उस वक्त जो दिल को छू लेता
वो आज का बेहद खूबसूरत गाना बन गया।
उस वक्त जो दिल को छू लेता
वो आज का बेहद खूबसूरत गाना बन गया।
चंद लफ्जों की डोरी में पिरोया
असल जिंदगी का तराना बन गया।।



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