Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

रचनाओं के माध्यम से साहित्य का सृजन , और समाज को नई दिशा...

Wednesday, 21 March 2018

तुम ऐसा कुछ लिख देना...

आज तुम यूं ही कुछ लिख देना -
जो अंतर्मन की गहराइयों से निकलकर,
होठों को गुनगुनाने पर मजबूर कर दे।
जिसके स्वर श्रोता के कानों में जाकर,
उसकी रूह को बखूबी झकझोर दे। 
हां तुम ऐसा ही कुछ लिख  देना -
तुम चाहो तो हमारी जुबानी लिख देना।
या मेरी और तुम्हारी कहानी लिख देना।
सीमाओं के बंधन को तोड़कर लिखना।
या तुम खुद को मुझसे जोड़कर लिखना।
सुनो.. दिल से, जज्बातों से-
सच... कुछ लिखना तुम जरूर। 
जिसका हर शब्द गमों से हो कोसों दूर।
थोड़ी दीवानगी, हो थोड़ा सा सुरूर।
जिसमें वजह हों मुस्कुराने की भरपूर।
तुम ऐसा ही कुछ लिख देना
मेरे मन से इस जीवन में एक नया तुम रंग देना।
बस ऐसा ही कुछ लिख देना... ।

No comments: