ऐ मेरे दोस्त,
मै तुम्हे खुद से कहीं ज्यादा याद हूँ।
मैं सिर्फ कहता ही था कि याद रखने के मामले में,
मैं उस्ताद हूँ।
सच तो यह है कि मैं शायद तुम्हें बहुत ज्यादा याद हूँ।
तुमने तो मेरी हर बारीकी पर गौर किया।
पर मैने तब न जाने क्या कुछ और किया।
मै,
मैं तुम्हे किसी कहानी की तरह याद हूँ।
ऐसा लगता है जैसे मैं तुममें आबाद हूँ।
तुम तो किसी उपन्यास की तरह हर पन्ना पढते रहे।
यकीं अब हो रहा है तुम मुझे हर क्षण कैद करते रहे।
तुमने वह जो कुछ भी याद दिलाया है।
वास्तव में -
मुझे खुद के ही खूबसूरत पलों से मिलाया है।
अब जो हर वक्त आंखों के सामने रहता वो तेरा चेहरा हो गया।
तुमसे ये दोस्ती का रिश्ता पहले से कहीं ज्यादा गहरा हो गया ।
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