उस काम को मत कीजिए है जिसमें बुराई ।
करिए करम कुछ ऐसा कि हो जग की भलाई ।
नफरत को मोहब्बत में जो तब्दील है करता ,
शान्ति के पथ का सदा जो अनुसरण करता ।
दुनिया में हर तरफ है यारों उसकी बड़ाई ।
उस काम को मत कीजिए है जिसमें बुराई ।।
इन्सानियत की बातें किताबों में लिखी हैं ,
स्कूलों मदरसों मे हर एक जन ने पढ़ी हैं ,
गीता हो या कुरान या गुरूग्रंथ बाईबिल ,
हर ग्रंथ ने सबको यही एक बात सिखाई ,
उस काम को मत कीजिए है जिसमें बुराई ।।
कहते हैं हम खुद को हम सब नौजवान हैं ,
अपने ही हाथों में इस देश की कमान है ,
क्यों बिकते चंद पैसों में ये जो इन्सान हैं ,
बस यही बात आज तक न समझ में आई ,
उस काम को मत कीजिए है जिसमें बुराई ।।
हो चैन और अमन देश में ऐसा विचार कर ,
नापाक इरादों का मन से तिरस्कार कर ,
जीवन में सभी के सदा खुशियों के रंग भर ,
हो हिन्दू मुसलमान या हो सिक्ख इसाई ,
उस काम को मत कीजिए है जिसमें बुराई ।।
करके भला तो देखें अपना खुद भला होगा ,
दुष्टों ने अपनी सजा को है यहीं पर भोगा ,
जैसी तेरी करनी वही भरनी मेरे भाई ,
सदियों से निरन्तर यही गाथा चली आई ,
उस काम को मत कीजिए है जिसमें बुराई ।।
रुक जाये कदम जो उठे अपराध के लिये,
जीवन की डगर में हमेशा शान से जिये,
सत्कर्म सदा कर तू जैसे बापू ने किये ,
हो तेरे हर एक शब्द में दृढ़ता और सच्चाई,
अंकित ने आप सब से यही अर्जी लगाई ।
उस काम को मत कीजिए है जिसमें बुराई ।
करिए करम कुछ ऐसा कि हो जग की भलाई ॥
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