एक दिन तुम्हारी उमर जायेगी ढल,
करोगे इस दौलत का क्या आखिरी पल।
तू मोती किसी का, तू हीरा किसी का,
तू जां है किसी की तू दिल है किसी का,
नही सोंचा तूने कभी ओ रे रहबर,
ने तेरा है कोई न तू है किसी का,
यही राज जीवन का है आज और कल...
एक दिन तुम्हारी उमर जायेगी ढल,
करोगे इस दौलत का क्या आखिरी पल।
जरा गौर से सुन लो बाते हमारी,
न जेब कफन में न कब्र में अलमारी,
ये परिवार वाले ये संसार वाले,
तू करके सभी कुछ इन्हीं के हवाले,
चोरी से चुपके से जायेगा निकल.....
एक दिन तुम्हारी उमर जायेगी ढल,
करोगे इस दौलत का क्या आखिरी पल,
वो माँ की दुआएं वो तेरी इच्छाएँ,
जो तुझको ये हर पल हैं याद दिलाएँ,
बुढ़ापे में तू ही है उनका सहारा,
तू ही तो है उनका असली गुजारा,
न उनकी उमंगों को ऐसे कुचल.....
एक दिन तुम्हारी उमर जायेगी ढल,
करोगे इस दौलत का क्या आखिरी पल।
उम्मीदों का दामन से टूटेगा नाता,
अगर तू उन्हें छोड़ कर यूं है जाता,
तुम्ही से वो जीते तुम्ही से हैं हारे,
रहेंगे तेरे बिन वो किसके सहारे,
तुम्ही उनकी हर एक मुश्किल का हल...
एक दिन तुम्हारी उमर जायेगी ढल,
करोगे इस दौलत का क्या आखिरी पल।
इस जीवन का एक फलसफा है पुराना,
सभी को इस दुनिया से एक दिन है जाना,
ये अरमान दिल के हो जाएंगे ठण्डे,
बनेगी चिता और लगेंगे फिर कण्डे,
न झेल सकेगा कोई ईश्वर के डण्डे,
तू इन जिल्लतों से जरा बच के निकल...
एक दिन तुम्हारी उमर जायेगी ढल,
करोगे इस दौलत का क्या आखिरी पल।
है अंकित की वाणी और जीवन के फण्डे
इन्हें याद रखना हो सण्डे या मण्डे-३
क्या......................................................
कि एक दिन तुम्हारी उमर जायेगी ढल,
करोगे इस दौलत का क्या आखिरी पल।
1 comment:
क्या आप अपने जीवन का सदुपयोग कर रहे हैं। हमेशा सत्कर्म करिये और खुद से वादा करें कि किसी की आंखों में भूल से भी आंसू न आने देंगे।
Post a Comment