Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

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Saturday, 20 June 2015

..योगा.. ( योग दिवस )


हे मानव ! अपने जीवन में,
यदि  नित्यदिन करोगे योगा ।
तो बिना रुपइया खर्च किए,
शत प्रतिशत लाभ तुम्हें होगा।


हर कोई इसे कर सकता है,     
छोटा, बड़ा, अमीर, गरीब।      
न औषधि की आवश्यकता है, 
न  ही  बीमारी आये करीब।    


भांति-भांति के आसन हैं, 
और  भिन्न-भिन्न हैं नाम।
शरीर के हर एक हिस्से को,
मिलता इससे बहुत आराम।




आभार प्रकट करता हूँ मैं,     
"मोदी जी" की सरकार का।   
जिन्होंने बीड़ा उठा लिया है,  
सब  रोगों  के  उपचार  का।  




21 जून को प्रण कर ले हम, 
प्राणायाम सभी अपनाएंगे।
बाबा रामदेव के आसन से,
जन जीवन समृद्ध  बनाएंगे।




2 comments:

Ek Kavita aisi bhi said...

"समस्त भारत वासियों को योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। "
आशा है कि आप अपने शरीर को स्वस्थ, सुदृढ़, एवं सुन्दर बनाने हेतु, आज से योगा को अपने जीवन का अहम् हिस्सा बनायेंगे।

Ek Kavita aisi bhi said...

योगा अथवा कविता के संबंध में अपने विचारों का आदान-प्रदान करें। आपका एक भी विचार हमारे लिये प्रेरणा है - धन्यवाद