जब मैं चल न सकता था तो, उंगली पकड़ के चलाया।
घोड़ा बनकर उन्होंने ही, हमे आंगन में घुमाया।
घोड़ा बनकर उन्होंने ही, हमे आंगन में घुमाया।
अलग- अलग नामों से, घर में सभी ने बुलाया।
पर पापा की नजरों में, राजा बेटा ही कहलाया।
पर पापा की नजरों में, राजा बेटा ही कहलाया।
अच्छे - बुरे का ज्ञान, हमे उनसे ही समझ आया।
कठिनाइयों से लड़ना, हमे उन्होंने सिखाया।
कठिनाइयों से लड़ना, हमे उन्होंने सिखाया।
जीवन के संघर्ष पथ पर, मैं जब कभी घबराया।
तब पापा की बातों ने ही, मेरा हौसला बढ़ाया।
मनुष्य का अवतार तो, माँ के जरिए पाया।
पर इंसान बनने का जज्बा, पापा ने ही जगाया।
पर इंसान बनने का जज्बा, पापा ने ही जगाया।



1 comment:
ये कविता मेरी ओर से दुनिया के प्रत्येक पिता को समर्पित है। मैं उनके कुशल जीवन की कामना करता हूँ।
पापा जी के लिये - I love u so much.
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