कविता ये मेरे जीवन का , हिस्सा बन गई।
बीते हुए पलों का, अहम् किस्सा बन गई।
वर्ण, शब्द, पंक्ति, और इनके ताल मेल।
भाव रुपी वृक्ष में, लिपटती है अमरबेल।
भूली बिसरी यादों का , अनमोल ये खजाना।
हर कड़ी में एहसासों को, होले-होले से सजाना।
हंसी छिपी इनमें, है खुशियों की किलकारी।
दुःख दर्द बयां करती रहती हैं, बारी - बारी।
कविताओं से सच्चा , हमसफर मिला न कोई।
जब मैं रोया मेरे साथ, मेरी कविता भी रोई।
बेचैन हो उठता हूँ , जब भी तन्हाई सताती है।
मेरी कविता ही है जो , मुझसे अकेले में बतलाती है।
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