Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

रचनाओं के माध्यम से साहित्य का सृजन , और समाज को नई दिशा...

Wednesday, 16 December 2015

.. मेरी कविता , मेरा जीवन..

कविता ये मेरे जीवन का , हिस्सा बन गई।
बीते हुए पलों का, अहम् किस्सा बन गई।

वर्ण, शब्द, पंक्ति, और इनके ताल मेल।
भाव रुपी वृक्ष में,   लिपटती है अमरबेल।

भूली बिसरी यादों का , अनमोल ये खजाना।
हर कड़ी में एहसासों  को, होले-होले से सजाना।

हंसी छिपी इनमें, है खुशियों की किलकारी।
दुःख दर्द बयां करती रहती हैं, बारी - बारी।

कविताओं से सच्चा , हमसफर मिला न कोई।
जब मैं रोया मेरे साथ, मेरी कविता भी रोई।

बेचैन हो उठता हूँ , जब भी तन्हाई सताती है।
मेरी कविता ही है जो , मुझसे अकेले में बतलाती है।


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