Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

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Monday, 22 February 2016

हवाओं का संदेशा है कि वो इस ओर आया है


हवाओं का संदेशा है कि वो इस ओर आया है।
घटाओं ने जिसे सिद्दत से शबनम सा सजाया है।
जिसके दीदार की खातिर ये नैना सो नही पाये
उसे लाखों की नजरों से बचाकर के चुराया है।

अब उनकी हर अदा मेरी रजा को रास आती है
उसके आते हंसी चलकर के मेरे पास आती है
सिवा उनके न मेरे पास कुछ भी है सहेजने को
न वो जो साथ होती है तो उसकी याद रहती है

बहूत रोका बहुत टोका मगर  कुछ भी न माने है
ये दिल तो चीज ऐसी है जिसे एक दिल ही जाने है।
नही है जोर मेरा अब मेरे इस दिल की धडकन पर
ये समझाता है मुझको हम तो उसके ही दिवाने है।

मेरी पहचान वह है जब कभी ये जिक्र करता हूँ
वो खुद से जान लेती हो मैं कितना प्यार करता हूँ
मेरी हर एक परेशानी  का वह ही तो हल बताती हो
उसे तकलीफ हो तो मैं जमाने भर से लड़ता हूँ

यहां हर प्यार की महफिल में हर आशिक जमूरा है
उसी से मिल के लगता है कि हर एक ख्वाब पूरा है
मेरी कीमत बढ़ाने में उसका जुड़ना जरूरी है।
मैं वो छल्ला अंगूठी का जो हीरे बिन अधूरा है।

मेरी चाहत मेरे महबूब से मुझको मिला देना।
जिस गली से वो आयेगी वहां कलियाँ  खिला देना। 
बहुत एहसान होगा गर किसकी है पहुंच इतनी
मुझे भी इश्क करने का कोई परमिट दिला देना

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