Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

रचनाओं के माध्यम से साहित्य का सृजन , और समाज को नई दिशा...

Tuesday, 22 March 2016

होली आ गई होली (holi aa gayi holi )

सीधी या गोली,
कुमकुम या रोली।
बन रही रंगोली,
चाहे महल या खोली।
होली है ये होली।
होली आ गई होली... होली आ गई होली।

रंगीन बाल, उड़ता गुलाल,
रंग भरी हर झोली।
मग्न मस्त, रंगीन वस्त्र,
घर घर आवे टोली। 
झूम - झूम गलियन में गावें,
होली है ये होली।
होली आ गई होली...रे भईया होली आ....

मनवा झूमे, लागे धरती घूमे,
खइके भंग की गोली।
मजा आ जाई, पी लियो ठंडाई,
मिल कर संग हमजोली।
मेवा मिश्री डालो, गुजिया निकालो
सब खाओ पूरनपोली।
होली है ये होली
होली आ गई होली... रे बन्धु होली आ....

मुन्नी प्यारी, मारे पिचकारी
रंग मिलावै रोली।
सुनहरी टोपी, ग्वाले - गोपी,
नाचे करे ठिठोली।
गले मिला लो, रंज भुला लो,
बोलो कोयल सी बोली।
होली है ये होली।
होली आ गई होली. . . रे मितवा होली आ. . . .

फाल्गुन बयार में होली, कुछ  इस तरह से आये,
कि पापड़ के जैसे कुरकुरे एवं रंगीन रिश्तों में,
गुजिया के जैसी मिठास आ जाये।
इसी कामना के साथ ईष्ट मित्रों एवं समस्त देशवासियों  को 'होलिकोत्सव' की हार्दिक शुभकामनाएं।
. . . . . . . . . . . . .  "अंकित जायसवाल"

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