Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

रचनाओं के माध्यम से साहित्य का सृजन , और समाज को नई दिशा...

Saturday, 15 October 2016

एक ऐसा ही..... परिवार हो

वफा की हवा हो और
खुशियों की खुश्बू,
उससे महकने वाला
घर - संसार हो,
ऐसा इस दुनिया में
अपना परिवार हो।

मेल मिले दिल का
हल हो मुश्किल का,
प्रेम के उजाले तले
गुल- ए- गुलज़ार हो,
ऐसा इस दुनिया में
अपना परिवार हो।

शुकूं की हो रोटी
हो पतली या मोटी,
उस पर मोहब्बत का
मीठा अचार हो,
ऐसा इस दुनिया में
अपना परिवार हो।

ईश्वर की माया हो
बुजुर्गों का साया हो,
उनकी दुआओं से
यश का भण्डार हो,
ऐसा इस दुनिया में
अपना परिवार हो।








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