Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

रचनाओं के माध्यम से साहित्य का सृजन , और समाज को नई दिशा...

Monday, 4 September 2017

"शिक्षक की भूमिका"

एक राह जिन्दगी में नयी रौशनी लाई,
भटके मुसाफिरों को ये क्या खूब है भाई।
मुश्किल डगर में जब कभी, निराश हुआ हूँ...
गुरु ज्ञान ने ही मन में नई आश जगाई।

गुरु ज्ञान के भण्डार को हम सब में बांटते,
हो गर बुराई कोई तो वो उसको काटते।
नादान को इंसान ,बनाने के ही लिये...
कभी कभी वो प्यार से हमको हैं डांटते।

जो थे कभी जीरो वो हीरो बन के हैं चलते,
इंजीनियर या डाक्टर के पद पे निकलते।
मंजिल को पाने में उन्हें, दिक्कत नही होती...
गुरु के दिखाये मार्ग से जो होकर गुजरते।

है कामना ये मन की करूँ स्वप्न सब साकार,
गुरूओं ने दिया जीवन को एक नया आकार।
इनकी शरण में खुद को, समर्पित किया जिसने ...
नईया भँवर से उसकी हो कर रहेगी पार।

हर रोज शिक्षकों से जो ज्ञान ले रहा हूँ,
उनकी ही प्रेरणा के पथ पे आगे बढ़ रहा हूँ
ऋण उनका कभी खुद से, चुका ही नही सकता..
कुछ शब्दों से आभार को अभिव्यक्त कर रहा हूं।



समस्त गुरूओं को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।


No comments: