Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

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Saturday, 16 September 2017

फिर कोई किस्सा नया तैयार होना चाहिए...

मेरे दिल में तेरे दिल में, प्यार होना चाहिए।
फिर कोई  किस्सा नया तैयार होना चाहिए।

कई दशक बीतें वो किस्सा हीर रांझा का हुए।
आशिकी थी एक चुनौती लैला-मजनू के लिये।
मुझको लगता है वही, इजहार होना चाहिए।
फिर कोई किस्सा नया तैयार होना चाहिए।

बिन तेरे ये दिल धड़कने पाये न अब एक पल।
मैं चलूँ तेरे मुताबिक तू भी मेरे साथ चल।
प्रेम के बंधन में बंधकर, इकरार होना चाहिए।
फिर कोई किस्सा नया तैयार होना चाहिए

पाठशाला प्रेम की हो और इश्क एक अध्याय हो।
खुद प्रोफेसर भी वहाँ कोई प्रेम डिग्री पाय हो।
विषय में श्रंगार रस का, इश्तहार होना चाहिए।
फिर कोई किस्सा नया तैयार होना चाहिए।

प्रेरणा बन कर सभी के दिल में छायें इस कदर।
प्रेम ही दिखता रहे तुम देख लो चाहे जिधर।।
जिसका हर पन्ना रंगा हो, आशिकी के रंग में।
बस वही हर हाथ में, अखबार होना चाहिए।
फिर कोई किस्सा नया तैयार होना चाहिए।


प्रेम में डूबे बिना न, उद्धार होना चाहिए।
फिर कोई किस्सा नया तैयार होना चाहिए।

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