कहलाता था ये अपना देश, कभी चिडि़या एक सोने की।
कहां उड गई, मेरे यारों कमी है उसके खोने की।
कहां उड गई, मेरे यारों कमी है उसके खोने की।
फिरंगी देश में जब आये, बहाने लाखों थे लाये।
किया व्यापार भारत में, ये सालों कहर थे ढाये।
किया व्यापार भारत में, ये सालों कहर थे ढाये।
रहे थे देश के भीतर, अन्न भी यहीं का खाया।
फिर भी भारतवासियों को, अंग्रेजों ने बहुत सताया।
फिर भी भारतवासियों को, अंग्रेजों ने बहुत सताया।
होंगे आजाद कब इनसे , यही हर दिल में चाहत थी।
दुर्दशा देख भारत की, बापू की रूह आहत थी।
दुर्दशा देख भारत की, बापू की रूह आहत थी।
भगत, आजाद जैसे वीरों ने, विद्रोह की ज्वाला भड़काई।
आंदोलन चले, प्राणों की आहुति, तब कहीं आजादी पाई।
आंदोलन चले, प्राणों की आहुति, तब कहीं आजादी पाई।
जब भारत के वीर सपूतों ने, इस मिट्टी का कर्ज चुकाया था।
तब 1947 में 15 अगस्त को, आजादी का जश्न मनाया था।
तब 1947 में 15 अगस्त को, आजादी का जश्न मनाया था।
हर साल इसी दिन हर दिल में, धड़कन में तिरंगा रहता है।
बच्चा - बच्चा भी भारत का, भारत मां की जय कहता है।
बच्चा - बच्चा भी भारत का, भारत मां की जय कहता है।
समय बदला, बदलाव हुए, पर कुछ तो कमी अभी बाकी है।
उस सोने की चिड़िया वाले, भारत की अधूरी झांकी है।
उस सोने की चिड़िया वाले, भारत की अधूरी झांकी है।
उम्मीद है हर भारतवासी की, भारत का परचम लहराये ।
अखिल विश्व में 'हिन्दुस्तान ' और 'हिन्दुस्तानी ' छा जायें।
अखिल विश्व में 'हिन्दुस्तान ' और 'हिन्दुस्तानी ' छा जायें।



No comments:
Post a Comment