Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

रचनाओं के माध्यम से साहित्य का सृजन , और समाज को नई दिशा...

Tuesday, 4 September 2018

कृष्ण जन्म

स्वर्ण मुकुट सिर सोहे सुंदर,
                माथे तिलक निराला ।
कंठ पड़ी मोतियन की माला,  
                ऐसो नंद का लाला ।

कान्हा कमर करधनी बांधै ,
                पैरन घुंघरू साजै।
सांझ समय यमुना के तट पर, 
                संग गोपियन के नाचै।


कोमल कमल अधर धरि बंसी,
                मधुर धुन को बजावें।
ग्वाल बाल संग छुप-छुप के,
                मटकी से माखन खावें।

(कृष्ण जन्माष्टमी की बधाई - अंकित जायसवाल )
 

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