Ek kavita aisi  bhi...  एक कविता ऐसी भी...

रचनाओं के माध्यम से साहित्य का सृजन , और समाज को नई दिशा...

Saturday, 27 October 2018

चांद नजर आया...



चांदनी जिसके संग है,
     वो चांद भी सरमाया ।
आज हर घर अटरिया पर,
      चांद नजर आया ।
      
कोई बेताब था,
      चांद के इंतजार में।
कोई डूबा हुआ,
      अपने चांद के प्यार में।

फिर क्या चांद की खता,
      कि वो आता नहीं।
आखिर चांद है वो,
     लाखो चांद को सताता नही।
      
हुआ दीदार जी भरके,
     चांद से चांद का।
हर तरफ दिखने लगा,
    मौसम इकरार का।

कोई खुश था कि,
      व्रत उसका पूरा हुआ।
किस ने मांग ली,
     दिल से लाखों दुआ।

चौथ करवा मनाना,
      प्यारा रिश्ता निभाना।
प्रेम पर्व प्रियतमा ये,
      पिय की आयु तुम बढ़ाना।

सभी शादीशुदा मित्रों को (जिनके लिये उनकी पत्नियों ने व्रत रखा और उन्होंने फलस्वरूप कीमती उपहार भेंट किया ) करवा चौथ हार्दिक बधाई। एवं इस अवसर को पाने की कतार में खड़े  मित्रों को अगले साल की अग्रिम शुभकामनाएं।
  आपका मित्र - अंकित जायसवाल
       

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